काली माता की आरती — अर्थ सहित
माँ काली शक्ति की सबसे प्रबल देवी हैं। वे अज्ञान और अहंकार का नाश करने वाली और भक्तों की रक्षा करने वाली हैं। यह आरती शनिवार और अमावस्या पर विशेष रूप से गाई जाती है।
जय काली माता, जय काली माता। श्याम रंग तन, मुंड की माला। रक्त जिह्वा, त्रिशूल धारी। जय काली माता, जय काली माता॥
शव पर नाचे काली माता। भैरव संग रहे विख्याता। शक्ति रूप तुम जग की दाता। जय काली माता, जय काली माता॥
दुष्ट दलन करि अभय दिलावे। भक्तों के सब संकट नशावे। महिषासुर को मार गिरावे। जय काली माता, जय काली माता॥
काशी में विराजे महाकाली। कलकत्ता में करे सब खाली। दक्षिणा काली अति रखवाली। जय काली माता, जय काली माता॥
काली की आरती जो नर गावे। सकल मनोरथ सिद्धि पावे। माँ की कृपा निरन्तर पावे। जय काली माता, जय काली माता॥
अर्थ
पद 1
जय काली माता, जय काली माता। श्याम रंग तन, मुंड की माला। रक्त जिह्वा, त्रिशूल धारी। जय काली माता, जय काली माता॥
हे काली माता, आपकी जय हो। आपका तन श्याम (काला) है, आपने मुंडों की माला पहनी है, लाल जीभ है और त्रिशूल धारण किया है।
पद 2
शव पर नाचे काली माता। भैरव संग रहे विख्याता। शक्ति रूप तुम जग की दाता। जय काली माता, जय काली माता॥
काली माता शव पर नृत्य करती हैं और भैरव के साथ प्रसिद्ध हैं। आप शक्ति के रूप में सारे जग की दाता हैं।
पद 3
दुष्ट दलन करि अभय दिलावे। भक्तों के सब संकट नशावे। महिषासुर को मार गिरावे। जय काली माता, जय काली माता॥
आप दुष्टों का नाश करके अभय प्रदान करती हैं, भक्तों के सभी संकट नष्ट करती हैं। आपने महिषासुर का वध किया।
पद 4
काशी में विराजे महाकाली। कलकत्ता में करे सब खाली। दक्षिणा काली अति रखवाली। जय काली माता, जय काली माता॥
काशी में महाकाली विराजती हैं, कलकत्ता में सबके भय को दूर करती हैं। दक्षिण काली सर्वोत्तम रक्षक हैं।
पद 5
काली की आरती जो नर गावे। सकल मनोरथ सिद्धि पावे। माँ की कृपा निरन्तर पावे। जय काली माता, जय काली माता॥
जो व्यक्ति काली माता की आरती गाए, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और माँ की कृपा निरंतर मिलती है।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
काली माता की पूजा कब करें?
काली माता की पूजा शनिवार, अमावस्या और नवरात्रि में विशेष रूप से की जाती है। रात्रि की पूजा अत्यंत फलदायक मानी जाती है।
काली माता का प्रसाद क्या होता है?
काली माता को लाल फूल, हिबिस्कस, नीम के पत्ते और मिठाई चढ़ाई जाती है। कुछ परंपराओं में पंचामृत भी चढ़ाया जाता है।