अध्याय 1 · अर्जुनविषाद योग · अर्जुन कहते हैं
गीता अध्याय 1, श्लोक 38 — लोभ से अंधे
यद्यप्येते न पश्यन्ति लोभोपहतचेतसः। कुलक्षयकृतं दोषं मित्रद्रोहे च पातकम् ॥
yadyapyete na paśyanti lobhopahatacetasaḥ | kulakṣayakṛtaṃ doṣaṃ mitradrohe ca pātakam ||
अर्थ
भले ही लोभ से अंधे हुए वे लोग कुल के नाश के दोष और मित्रों से द्रोह के पाप को न देख पा रहे हों...