अध्याय 10 · विभूति योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 10, श्लोक 41 — उनके तेज का अंश
यद्यद्विभूतिमत्सत्त्वं श्रीमदूर्जितमेव वा। तत्तदेवावगच्छ त्वं मम तेजोंऽशसम्भवम् ॥
yadyadvibhūtimatsattvaṃ śrīmadūrjitameva vā | tattadevāvagaccha tvaṃ mama tejoṃśasambhavam ||
अर्थ
जो कुछ भी विभूति वाला, सुंदर या शक्तिशाली है, उसे मेरे तेज के एक छोटे से अंश से उत्पन्न हुआ जानो।
आज के जीवन में
जब भी किसी में सुंदरता, प्रतिभा या महानता दिखे, उसे ईश्वर की एक झलक मानकर सम्मान दें।