अध्याय 11 · विश्वरूपदर्शन योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 11, श्लोक 7 — एक जगह सारा जगत
इहैकस्थं जगत्कृत्स्नं पश्याद्य सचराचरम्। मम देहे गुडाकेश यच्चान्यद् द्रष्टुमिच्छसि ॥
ihaikasthaṃ jagatkṛtsnaṃ paśyādya sacarācaram | mama dehe guḍākeśa yaccānyad draṣṭumicchasi ||
अर्थ
आज यहाँ मेरे शरीर में एक ही जगह पर सारे चर-अचर जगत को देखो, और जो कुछ भी तुम देखना चाहो, वह भी देखो।