अध्याय 13 · क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभाग योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 13, श्लोक 29 — हर जगह ईश्वर दर्शन
समं पश्यन्हि सर्वत्र समवस्थितमीश्वरम्। न हिनस्त्यात्मनात्मानं ततो याति परां गतिम् ॥
samaṃ paśyanhi sarvatra samavasthitamīśvaram | na hinastyātmanātmānaṃ tato yāti parāṃ gatim ||
अर्थ
सब जगह समान रूप से स्थित ईश्वर को देखता हुआ वह अपने द्वारा अपनी आत्मा को हानि नहीं पहुँचाता, और इसलिए परम गति पाता है।