अध्याय 16 · दैवासुरसम्पद्विभाग योग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता अध्याय 16, श्लोक 6 — दो प्रकार के प्राणी

द्वौ भूतसर्गौ लोकेऽस्मिन्दैव आसुर एव च। दैवो विस्तरशः प्रोक्त आसुरं पार्थ मे शृणु ॥

dvau bhūtasargau loke'smindaiva āsura eva ca | daivo vistaraśaḥ prokta āsuraṃ pārtha me śṛṇu ||

अर्थ

इस संसार में प्राणी दो तरह के होते हैं — दैवी और आसुरी। दैवी स्वभाव विस्तार से बता चुका हूँ, अब आसुरी स्वभाव के बारे में सुनो।

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