अध्याय 18 · मोक्षसंन्यास योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 18, श्लोक 42 — ब्राह्मण के गुण
शमो दमस्तपः शौचं क्षान्तिरार्जवमेव च। ज्ञानं विज्ञानमास्तिक्यं ब्रह्मकर्म स्वभावजम् ॥
śamo damastapaḥ śaucaṃ kṣāntirārjavameva ca | jñānaṃ vijñānamāstikyaṃ brahmakarma svabhāvajam ||
अर्थ
मन की शांति, इंद्रियों पर संयम, तप, पवित्रता, क्षमा, सरलता, ज्ञान, अनुभव और ईश्वर में आस्था — ये ब्राह्मण के स्वाभाविक कर्म हैं।