अध्याय 3 · कर्म योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 3, श्लोक 19 — आसक्ति-रहित कर्तव्य
तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर। असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुषः ॥
tasmādasaktaḥ satataṃ kāryaṃ karma samācara | asakto hyācarankarma paramāpnoti pūruṣaḥ ||
अर्थ
इसलिए आसक्ति छोड़कर सदा अपना कर्तव्य-कर्म भली-भाँति करते रहो। आसक्ति के बिना कर्म करने से मनुष्य परमात्मा को पाता है।
आज के जीवन में
परिवार और काम के प्रति अपना कर्तव्य पूरी तरह निभाएँ, पर अपनी खुशी को उसकी तारीफ़ से न बाँधें।