अध्याय 3 · कर्म योग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता अध्याय 3, श्लोक 41 — पहले इंद्रियों को साधो

तस्मात्त्वमिन्द्रियाण्यादौ नियम्य भरतर्षभ। पाप्मानं प्रजहि ह्येनं ज्ञानविज्ञाननाशनम् ॥

tasmāttvamindriyāṇyādau niyamya bharatarṣabha | pāpmānaṃ prajahi hyenaṃ jñānavijñānanāśanam ||

अर्थ

इसलिए हे भरतश्रेष्ठ, पहले इंद्रियों को वश में करो और फिर ज्ञान-विज्ञान का नाश करने वाले इस पापी काम को नष्ट करो।

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