अध्याय 6 · आत्मसंयम योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 6, श्लोक 23 — दुख से मुक्ति ही योग
तं विद्याद् दुःखसंयोगवियोगं योगसंज्ञितम्। स निश्चयेन योक्तव्यो योगोऽनिर्विण्णचेतसा ॥
taṃ vidyād duḥkhasaṃyogaviyogaṃ yogasaṃjñitam | sa niścayena yoktavyo yogo'nirviṇṇacetasā ||
अर्थ
— उसी को योग समझो, जो दुख के संबंध से छुटकारा है। इस योग का अभ्यास दृढ़ निश्चय के साथ और बिना उकताए हुए मन से करना चाहिए।