अध्याय 7 · ज्ञानविज्ञान योग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता अध्याय 7, श्लोक 6 — सबका आदि और अंत

एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय। अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा ॥

etadyonīni bhūtāni sarvāṇītyupadhāraya | ahaṃ kṛtsnasya jagataḥ prabhavaḥ pralayastathā ||

अर्थ

समझ लो कि सब प्राणी इन्हीं दोनों प्रकृतियों से पैदा होते हैं। मैं ही पूरे जगत का आरंभ हूं और मैं ही उसका अंत (प्रलय) हूं।

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