अध्याय 8 · अक्षरब्रह्म योग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता अध्याय 8, श्लोक 26 — शुक्ल और कृष्ण गति

शुक्लकृष्णे गती ह्येते जगतः शाश्वते मते। एकया यात्यनावृत्तिमन्ययावर्तते पुनः ॥

śuklakṛṣṇe gatī hyete jagataḥ śāśvate mate | ekayā yātyanāvṛttimanyayāvartate punaḥ ||

अर्थ

जगत के ये दो मार्ग — शुक्ल (प्रकाश) और कृष्ण (अंधकार) — सनातन माने गए हैं। एक से जाने वाला लौटता नहीं, दूसरे से जाने वाला फिर लौट आता है।

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