अध्याय 9 · राजविद्याराजगुह्य योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 9, श्लोक 13 — महात्माओं की भक्ति
महात्मानस्तु मां पार्थ दैवीं प्रकृतिमाश्रिताः। भजन्त्यनन्यमनसो ज्ञात्वा भूतादिमव्ययम् ॥
mahātmānastu māṃ pārtha daivīṃ prakṛtimāśritāḥ | bhajantyananyamanaso jñātvā bhūtādimavyayam ||
अर्थ
हे पार्थ, पर महात्मा लोग दैवी स्वभाव का आश्रय लेकर, मुझे सब प्राणियों का आदि और अविनाशी जानकर, अनन्य मन से मुझे भजते हैं।