अध्याय 9 · राजविद्याराजगुह्य योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 9, श्लोक 27 — सब कुछ भगवान को अर्पण
यत्करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत्। यत्तपस्यसि कौन्तेय तत्कुरुष्व मदर्पणम् ॥
yatkaroṣi yadaśnāsi yajjuhoṣi dadāsi yat | yattapasyasi kaunteya tatkuruṣva madarpaṇam ||
अर्थ
हे कौन्तेय, तुम जो कुछ करते हो, जो खाते हो, जो हवन करते हो, जो दान देते हो और जो तप करते हो — वह सब मुझे अर्पित करो।
आज के जीवन में
पढ़ाई, नौकरी, खाना या सेवा — हर काम को भगवान की भेंट मानकर करें, तो साधारण दिन भी पूजा बन जाता है।