अध्याय 9 · राजविद्याराजगुह्य योग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता अध्याय 9, श्लोक 3 — श्रद्धा का महत्व

अश्रद्दधानाः पुरुषा धर्मस्यास्य परन्तप। अप्राप्य मां निवर्तन्ते मृत्युसंसारवर्त्मनि ॥

aśraddadhānāḥ puruṣā dharmasyāsya parantapa | aprāpya māṃ nivartante mṛtyusaṃsāravartmani ||

अर्थ

हे परंतप, इस धर्म में श्रद्धा न रखने वाले लोग मुझे न पाकर मृत्यु रूपी संसार के मार्ग में लौटते रहते हैं।

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