गायत्री मंत्र — अर्थ और जप विधि
ऋग्वेद का यह मंत्र बुद्धि को सही दिशा देने की प्रार्थना है। सुबह सूर्योदय के समय जप करना सबसे शुभ माना जाता है।
ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥
अर्थ
मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥
हम उस दिव्य सविता (सूर्य रूपी परमात्मा) के श्रेष्ठ तेज का ध्यान करते हैं, जो पृथ्वी, अंतरिक्ष और स्वर्ग में व्याप्त है — वह हमारी बुद्धि को सही दिशा में प्रेरित करे।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गायत्री मंत्र कितनी बार जपें?
सामान्यतः 108 बार (एक माला)। शुरुआत 11 या 21 बार से भी कर सकते हैं।
गायत्री मंत्र किस वेद से है?
ऋग्वेद (मंडल 3, सूक्त 62, मंत्र 10) से, जिसके ऋषि विश्वामित्र हैं।