अम्बे तू है जगदम्बे काली आरती — अर्थ सहित

'अम्बे तू है जगदम्बे काली' माँ दुर्गा और काली की बहुत लोकप्रिय आरती है, जो सरल हिंदी में है। इसमें माँ और बच्चे के निर्मल रिश्ते की बात है — भक्त धन-दौलत नहीं, माँ के मन में एक छोटा-सा कोना माँगता है। नवरात्रि, जगराते और देवी मंदिरों में यह खूब गाई जाती है।

3 पद व टेक · लगभग 5 मिनट

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली। तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

तेरे भक्त जनों पर माता, भीर पड़ी है भारी। दानव दल पर टूट पड़ो माँ, करके सिंह सवारी॥ सौ-सौ सिंहों से तू बलशाली, अष्ट भुजाओं वाली, दुष्टों को पल में संहारती। ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

माँ बेटे का है इस जग में, बड़ा ही निर्मल नाता। पूत कपूत सुने हैं पर ना, माता सुनी कुमाता॥ सब पे करुणा दरसाने वाली, अमृत बरसाने वाली, दुखियों के दुखड़े निवारती। ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

नहीं माँगते धन और दौलत, न चाँदी न सोना। हम तो माँगें माँ तेरे मन में, इक छोटा सा कोना॥ सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली, सतियों के सत को सँवारती। ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'अम्बे तू है जगदम्बे काली' कब गाई जाती है?

नवरात्रि के नौ दिनों में सुबह-शाम, जगराते और माता की चौकी में, और शुक्रवार या मंगलवार की देवी पूजा के अंत में।

यह आरती किसने लिखी?

इस आरती के लेखक का नाम निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है। यह आधुनिक समय की हिंदी आरती है जो भजन-संध्याओं और रिकॉर्डिंग से घर-घर पहुँची।

क्या इसे 'जय अम्बे गौरी' के साथ गा सकते हैं?

हाँ। बहुत से घरों और पंडालों में पहले 'जय अम्बे गौरी' और फिर 'अम्बे तू है जगदम्बे काली' गाई जाती है।

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