श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ — अर्थ सहित
बांके बिहारी जी वृंदावन में विराजमान श्रीकृष्ण का प्रसिद्ध रूप हैं, जिन्हें संत स्वामी हरिदास जी ने प्रकट किया माना जाता है। 'बांके' यानी तीन जगह से मुड़े हुए, त्रिभंगी मुद्रा में खड़े कृष्ण। यह सरल, मीठी आरती उनके मोर मुकुट, बांसुरी और चरणों की महिमा गाती है।
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ। हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ। आरती गाऊँ प्यारे आपको रिझाऊँ। श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
मोर मुकुट प्यारे शीश पे सोहे। प्यारी बंसी मेरो मन मोहे। देख छवि बलिहारी मैं जाऊँ॥
चरणों से निकली गंगा प्यारी। जिसने सारी दुनिया तारी। मैं उन चरणों के दर्शन पाऊँ॥
दास अनाथ के नाथ आप हो। दुःख सुख जीवन प्यारे साथ आप हो। हरि चरणों में शीश झुकाऊँ॥
श्री हरिदास के प्यारे तुम हो। मेरे मोहन जीवन प्यारे तुम हो। देख युगल छवि बलि बलि जाऊँ॥
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ। हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ॥
अर्थ
पद 1
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ। हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ। आरती गाऊँ प्यारे आपको रिझाऊँ। श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
हे श्री बांके बिहारी, हे गिरिधर, मैं आपकी आरती गाऊँ। हे प्यारे, आरती गाकर मैं आपको प्रसन्न करूँ।
पद 2
मोर मुकुट प्यारे शीश पे सोहे। प्यारी बंसी मेरो मन मोहे। देख छवि बलिहारी मैं जाऊँ॥
हे प्यारे, आपके सिर पर मोर मुकुट शोभा देता है और आपकी प्यारी बांसुरी मेरा मन मोह लेती है। आपकी छवि देखकर मैं न्योछावर हो जाऊँ।
पद 3
चरणों से निकली गंगा प्यारी। जिसने सारी दुनिया तारी। मैं उन चरणों के दर्शन पाऊँ॥
आपके चरणों से प्यारी गंगा निकली, जिसने सारी दुनिया को तार दिया। मुझे उन चरणों के दर्शन मिलें।
पद 4
दास अनाथ के नाथ आप हो। दुःख सुख जीवन प्यारे साथ आप हो। हरि चरणों में शीश झुकाऊँ॥
आप अनाथ सेवकों के स्वामी हैं। हे प्यारे, जीवन के दुख-सुख में आप ही साथ हैं। हे हरि, मैं आपके चरणों में सिर झुकाऊँ।
पद 5
श्री हरिदास के प्यारे तुम हो। मेरे मोहन जीवन प्यारे तुम हो। देख युगल छवि बलि बलि जाऊँ॥
आप स्वामी हरिदास जी के प्यारे हैं; हे मेरे मोहन, आप मेरे जीवन से भी प्यारे हैं। राधा-कृष्ण की युगल छवि देखकर मैं बार-बार न्योछावर हो जाऊँ।
पद 6
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ। हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ॥
हे श्री बांके बिहारी, हे गिरिधर, मैं आपकी आरती गाऊँ।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बांके बिहारी जी का मंदिर कहाँ है?
उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले में वृंदावन में। यह ब्रज के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है।
स्वामी हरिदास कौन थे?
स्वामी हरिदास 16वीं सदी के संत और संगीतज्ञ थे। मान्यता है कि उनकी भक्ति से बांके बिहारी जी निधिवन में प्रकट हुए।
'बांके' का अर्थ क्या है?
'बांके' यानी टेढ़े या तीन जगह से मुड़े हुए। यह कृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा को बताता है, जिसमें वे बांसुरी बजाते खड़े हैं।