आरती कीजै हनुमान लला की — अर्थ सहित

हनुमान चालीसा के बाद गाई जाने वाली सबसे लोकप्रिय आरती। मंगलवार और शनिवार की पूजा में विशेष रूप से गाई जाती है।

12 पद · लगभग 4 मिनट

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जाके बल से गिरिवर काँपे। रोग दोष जाके निकट न झाँके॥

अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतन के प्रभु सदा सहाई॥

दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥

लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥

लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सँवारे॥

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि सजीवन प्राण उबारे॥

पैठि पाताल तोरि जम-कारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥

बाएँ भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे॥

सुर नर मुनि आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥

कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई॥

जो हनुमानजी की आरती गावै। बसि बैकुंठ परमपद पावै॥

इसके बाद पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमान जी की आरती कब करनी चाहिए?

सुबह और शाम की पूजा के अंत में, आमतौर पर हनुमान चालीसा के पाठ के बाद।

आरती में क्या चाहिए?

एक दीपक या कपूर, फूल, और श्रद्धा। सबसे ज़रूरी है पूरा मन लगाकर गाना।

इस बारे में कुछ पूछें

पढ़ने की सेटिंग

रंग

अक्षर का आकार