श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन स्तुति — अर्थ सहित

'श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन' गोस्वामी तुलसीदास की विनय पत्रिका का प्रसिद्ध पद है, जिसे राम स्तुति कहा जाता है। इसमें श्रीराम के कमल जैसे नेत्रों, साँवले रूप और वीरता का वर्णन है। इसके बाद प्रायः रामचरितमानस का गौरी-आशीर्वाद वाला छंद और सोरठा गाया जाता है। राम नवमी और रोज़ की आरती में यह गाई जाती है।

6 छंद व 1 सोरठा · लगभग 5 मिनट

श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं। नवकंज-लोचन कंज-मुख कर-कंज पद-कंजारुणं॥

कन्दर्प अगणित अमित छवि नवनील-नीरद सुन्दरं। पटपीत मानहुँ तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं॥

भजु दीनबन्धु दिनेश दानव-दैत्य-वंश-निकन्दनं। रघुनन्द आनन्दकन्द कोशलचन्द्र दशरथ-नन्दनं॥

सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणं। आजानु-भुज शर-चाप-धर संग्राम-जित-खरदूषणं॥

इति वदति तुलसीदास शंकर-शेष-मुनि-मन-रंजनं। मम हृदय-कंज निवास कुरु कामादि खलदल-गंजनं॥

मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर साँवरो। करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो॥ एहि भाँति गौरि असीस सुनि सिय सहित हियँ हरषीं अली। तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली॥

॥ दोहा ॥

जानि गौरि अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि। मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे॥

इसके बाद पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन' किसने लिखी?

पहले पाँच छंद गोस्वामी तुलसीदास (16वीं सदी) की 'विनय पत्रिका' से हैं। बाद का छंद और सोरठा उन्हीं के रामचरितमानस (बालकांड) से है, जहाँ माँ गौरी सीता जी को आशीर्वाद देती हैं।

राम स्तुति कब गाई जाती है?

सुबह-शाम की राम पूजा में, राम नवमी, विवाह पंचमी और दीपावली पर, और रामायण पाठ या सुंदरकांड के बाद आरती के साथ।

अंत में गौरी-आशीर्वाद वाला छंद क्यों गाया जाता है?

परंपरा से यह शुभ और मंगल का भाव लाता है। कई अविवाहित कन्याएँ भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से इस छंद को श्रद्धा से गाती हैं।

इस बारे में कुछ पूछें

पढ़ने की सेटिंग

रंग

अक्षर का आकार