राम चालीसा — अर्थ सहित

श्री राम चालीसा भगवान श्रीराम की स्तुति है, जो 'श्री रघुबीर भक्त हितकारी' से शुरू होती है। इसमें राम नाम की महिमा, हनुमान, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और माता सीता का गुणगान है। अंतिम पंक्तियों में हरिदास का नाम आता है। राम नवमी और किसी भी दिन, विशेषकर सात दिन नियम से, इसका पाठ किया जाता है।

45 चौपाई, 2 दोहे · लगभग 9 मिनट

॥ चौपाई ॥

श्री रघुबीर भक्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥

॥ चौपाई ॥

निशि दिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहिं होई॥

॥ चौपाई ॥

ध्यान धरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्मा इन्द्र पार नहिं पाहीं॥

॥ चौपाई ॥

जय जय जय रघुनाथ कृपाला। सदा करो सन्तन प्रतिपाला॥

॥ चौपाई ॥

दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहूँ पुर जाना॥

॥ चौपाई ॥

तुव भुजदण्ड प्रचण्ड कृपाला। रावण मारि सुरन प्रतिपाला॥

॥ चौपाई ॥

तुम अनाथ के नाथ गोसाईं। दीनन के हो सदा सहाई॥

॥ चौपाई ॥

ब्रह्मादिक तव पार न पावैं। सदा ईश तुम्हरो यश गावैं॥

॥ चौपाई ॥

चारिउ वेद भरत हैं साखी। तुम भक्तन की लज्जा राखी॥

॥ चौपाई ॥

गुण गावत शारद मन माहीं। सुरपति ताको पार न पाहीं॥

॥ चौपाई ॥

नाम तुम्हार लेत जो कोई। ता सम धन्य और नहिं होई॥

॥ चौपाई ॥

राम नाम है अपरम्पारा। चारिहु वेदन जाहि पुकारा॥

॥ चौपाई ॥

गणपति नाम तुम्हारो लीन्हों। तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हों॥

॥ चौपाई ॥

शेष रटत नित नाम तुम्हारा। महि को भार शीश पर धारा॥

॥ चौपाई ॥

फूल समान रहत सो भारा। पावत कोउ न तुम्हरो पारा॥

॥ चौपाई ॥

भरत नाम तुम्हरो उर धारो। तासों कबहुँ न रण में हारो॥

॥ चौपाई ॥

नाम शत्रुहन हृदय प्रकाशा। सुमिरत होत शत्रु कर नाशा॥

॥ चौपाई ॥

लषन तुम्हारे आज्ञाकारी। सदा करत सन्तन रखवारी॥

॥ चौपाई ॥

ताते रण जीते नहिं कोई। युद्ध जुरे यमहूँ किन होई॥

॥ चौपाई ॥

महा लक्ष्मी धर अवतारा। सब विधि करत पाप को छारा॥

॥ चौपाई ॥

सीता राम पुनीता गायो। भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो॥

॥ चौपाई ॥

घट सों प्रकट भई सो आई। जाको देखत चन्द्र लजाई॥

॥ चौपाई ॥

सो तुमरे नित पांव पलोटत। नवो निद्धि चरणन में लोटत॥

॥ चौपाई ॥

सिद्धि अठारह मंगल कारी। सो तुम पर जावै बलिहारी॥

॥ चौपाई ॥

औरहु जो अनेक प्रभुताई। सो सीतापति तुमहिं बनाई॥

॥ चौपाई ॥

इच्छा ते कोटिन संसारा। रचत न लागत पल की बारा॥

॥ चौपाई ॥

जो तुम्हरे चरनन चित लावै। ताको मुक्ति अवसि हो जावै॥

॥ चौपाई ॥

सुनहु राम तुम तात हमारे। तुमहिं भरत कुल पूज्य प्रचारे॥

॥ चौपाई ॥

तुमहिं देव कुल देव हमारे। तुम गुरु देव प्राण के प्यारे॥

॥ चौपाई ॥

जो कुछ हो सो तुमहीं राजा। जय जय जय प्रभु राखो लाजा॥

॥ चौपाई ॥

रामा आत्मा पोषण हारे। जय जय जय दशरथ के प्यारे॥

॥ चौपाई ॥

जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरूपा। निर्गुण ब्रह्म अखण्ड अनूपा॥

॥ चौपाई ॥

सत्य सत्य जय सत्यव्रत स्वामी। सत्य सनातन अन्तर्यामी॥

॥ चौपाई ॥

सत्य भजन तुम्हरो जो गावै। सो निश्चय चारों फल पावै॥

॥ चौपाई ॥

सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं। तुमने भक्तहिं सब सिद्धि दीन्हीं॥

॥ चौपाई ॥

ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरूपा। नमो नमो जय जगपति भूपा॥

॥ चौपाई ॥

धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा। नाम तुम्हार हरत संतापा॥

॥ चौपाई ॥

सत्य शुद्ध देवन मुख गाया। बजी दुन्दुभी शंख बजाया॥

॥ चौपाई ॥

सत्य सत्य तुम सत्य सनातन। तुमहीं हो हमरे तन मन धन॥

॥ चौपाई ॥

याको पाठ करे जो कोई। ज्ञान प्रकट ताके उर होई॥

॥ चौपाई ॥

आवागमन मिटै तिहि केरा। सत्य वचन माने शिव मेरा॥

॥ चौपाई ॥

और आस मन में जो ल्यावै। तुलसी दल अरु फूल चढ़ावै॥

॥ चौपाई ॥

साग पत्र सो भोग लगावै। सो नर सकल सिद्धता पावै॥

॥ चौपाई ॥

अन्त समय रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥

॥ चौपाई ॥

श्री हरिदास कहै अरु गावै। सो बैकुण्ठ धाम को पावै॥

॥ दोहा ॥

सात दिवस जो नेम कर, पाठ करे चित लाय। हरिदास हरि कृपा से, अवसि भक्ति को पाय॥

॥ दोहा ॥

राम चालीसा जो पढ़े, राम चरण चित लाय। जो इच्छा मन में करै, सकल सिद्ध हो जाय॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम चालीसा कब पढ़नी चाहिए?

इसे किसी भी दिन पढ़ा जा सकता है। राम नवमी, दिवाली, विवाह पंचमी और हर गुरुवार या मंगलवार को भी कई भक्त इसका पाठ करते हैं। सुबह स्नान के बाद राम दरबार के सामने दीप जलाकर पढ़ना अच्छा माना जाता है।

राम चालीसा कितने दिन पढ़ें?

चालीसा के अंतिम दोहे में सात दिन नियम से पाठ करने की बात कही गई है, इसलिए कई भक्त सात दिन का संकल्प लेते हैं। रोज़ एक बार प्रेम से पढ़ना भी पर्याप्त है।

राम चालीसा पढ़ने से क्या लाभ माना जाता है?

भक्तों का विश्वास है कि राम नाम का स्मरण मन को शांत और निर्मल करता है, और श्रद्धा से पाठ करने पर भक्ति बढ़ती है। चालीसा यह भी सिखाती है कि भगवान तुलसी-दल और साग जैसी सादी भेंट को भी प्रेम से स्वीकार करते हैं।

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