अध्याय 14 · गुणत्रयविभाग योग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता अध्याय 14, श्लोक 16 — गुणों के फल

कर्मणः सुकृतस्याहुः सात्त्विकं निर्मलं फलम्। रजसस्तु फलं दुःखमज्ञानं तमसः फलम् ॥

karmaṇaḥ sukṛtasyāhuḥ sāttvikaṃ nirmalaṃ phalam | rajasastu phalaṃ duḥkhamajñānaṃ tamasaḥ phalam ||

अर्थ

अच्छे कर्म का फल सात्त्विक और निर्मल कहा गया है, रजोगुण का फल दुख है और तमोगुण का फल अज्ञान है।

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