अध्याय 14 · गुणत्रयविभाग योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 14, श्लोक 17 — गुणों से क्या जन्मता है
सत्त्वात्सञ्जायते ज्ञानं रजसो लोभ एव च। प्रमादमोहौ तमसो भवतोऽज्ञानमेव च ॥
sattvātsañjāyate jñānaṃ rajaso lobha eva ca | pramādamohau tamaso bhavato'jñānameva ca ||
अर्थ
सत्त्व से ज्ञान पैदा होता है, रज से लोभ, और तम से लापरवाही, मोह और अज्ञान पैदा होते हैं।