अध्याय 2 · सांख्य योग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता अध्याय 2, श्लोक 16 — सत्य और असत्य

नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतः। उभयोरपि दृष्टोऽन्तस्त्वनयोस्तत्त्वदर्शिभिः ॥

nāsato vidyate bhāvo nābhāvo vidyate sataḥ | ubhayorapi dṛṣṭo'ntastvanayostattvadarśibhiḥ ||

अर्थ

असत्य का कोई स्थायी अस्तित्व नहीं, और सत्य का कभी अभाव नहीं होता। तत्व को जानने वालों ने इन दोनों का सार देखा है।

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