अध्याय 2 · सांख्य योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 2, श्लोक 40 — कोई प्रयास व्यर्थ नहीं
नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते। स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात् ॥
nehābhikramanāśo'sti pratyavāyo na vidyate | svalpamapyasya dharmasya trāyate mahato bhayāt ||
अर्थ
इस मार्ग में किया गया कोई प्रयास व्यर्थ नहीं जाता और अधूरा रहने पर भी उल्टा फल नहीं मिलता। इसका थोड़ा-सा अभ्यास भी बड़े भय से बचा लेता है।