अध्याय 2 · सांख्य योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 2, श्लोक 53 — स्थिर बुद्धि
श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला। समाधावचला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि ॥
śrutivipratipannā te yadā sthāsyati niścalā | samādhāvacalā buddhistadā yogamavāpsyasi ||
अर्थ
जब अनेक तरह की बातें सुनकर उलझी तुम्हारी बुद्धि समाधि में स्थिर और अचल हो जाएगी, तब तुम योग को पा लोगे।