अध्याय 8 · अक्षरब्रह्म योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 8, श्लोक 7 — स्मरण करो और कर्म करो
तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च। मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयः (orसंशयम्) ॥
tasmātsarveṣu kāleṣu māmanusmara yudhya ca | mayyarpitamanobuddhirmāmevaiṣyasyasaṃśayaḥ ||
अर्थ
इसलिए हर समय मुझे याद करो और युद्ध (अपना कर्तव्य) भी करो। मुझमें मन और बुद्धि अर्पित करने से तुम निस्संदेह मुझे ही पाओगे।
आज के जीवन में
भक्ति के लिए काम छोड़ना ज़रूरी नहीं — अपना काम पूरी ईमानदारी से करते हुए मन में भगवान को याद रखें।