धन्वन्तरि मंत्र — अर्थ और जप विधि
भगवान धन्वंतरि भगवान विष्णु के अवतार और आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं। पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के समय वे हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। धनतेरस का दिन उनकी जयंती के रूप में मनाया जाता है। भक्त इस मंत्र से उनकी प्रार्थना करते हैं।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वन्तरये अमृतकलशहस्ताय सर्वामयविनाशनाय त्रैलोक्यनाथाय श्रीमहाविष्णवे नमः॥
अर्थ
मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वन्तरये अमृतकलशहस्ताय सर्वामयविनाशनाय त्रैलोक्यनाथाय श्रीमहाविष्णवे नमः॥
भगवान वासुदेव के रूप धन्वंतरि को नमस्कार, जिनके हाथ में अमृत का कलश है, जो सब रोगों का नाश करने वाले माने जाते हैं, जो तीनों लोकों के स्वामी हैं — उन श्री महाविष्णु को नमस्कार।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
धन्वंतरि मंत्र कितनी बार जपें?
सामान्यतः 11, 21 या 108 बार। धनतेरस पर भक्त विशेष रूप से इसका जप करते हैं।
धन्वंतरि मंत्र कब बोलें?
धनतेरस (धन्वंतरि जयंती) पर, सुबह की पूजा में, या किसी अपने के लिए प्रार्थना करते समय। यह प्रार्थना है — डॉक्टर की सलाह और इलाज का विकल्प नहीं।
भगवान धन्वंतरि कौन हैं?
वे भगवान विष्णु के अवतार और आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं। भागवत आदि पुराणों के अनुसार वे समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।