हनुमान गायत्री मंत्र — अर्थ और जप विधि

हनुमान गायत्री मंत्र गायत्री छंद में हनुमान जी की प्रार्थना है। इसमें उन्हें माता अंजनी के पुत्र आंजनेय और पवनपुत्र कहकर ध्यान किया जाता है। भक्त इससे हनुमान जी जैसी शक्ति, साहस, बुद्धि और भक्ति की प्रार्थना करते हैं। मंगलवार और शनिवार को इसका जप लोकप्रिय है।

1 मंत्र · 108 जप ≈ 12 मिनट

ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमान गायत्री मंत्र कितनी बार जपें?

सामान्यतः 108 बार (एक माला)। शुरुआत में 11 या 21 बार से भी कर सकते हैं।

यह मंत्र कब जपना चाहिए?

मंगलवार और शनिवार को, हनुमान जयंती पर, सुबह स्नान के बाद या हनुमान चालीसा पाठ से पहले।

'आंजनेय' का अर्थ क्या है?

'आंजनेय' यानी माता अंजनी के पुत्र। हनुमान जी के पिता वानरराज केसरी थे और वे पवन देव के आशीर्वाद से जन्मे, इसलिए उन्हें पवनपुत्र भी कहते हैं।

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