सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये — दुर्गा मंत्र अर्थ सहित

यह माँ दुर्गा का अत्यंत प्रिय श्लोक है, जो दुर्गा सप्तशती के ग्यारहवें अध्याय (नारायणी स्तुति) से है। इसमें देवी को सब मंगलों का भी मंगल, कल्याण करने वाली और शरण देने वाली कहकर प्रणाम किया गया है। नवरात्रि, पूजा और आरती में इसे बहुत गाया जाता है।

1 श्लोक · लगभग 1 मिनट

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये मंत्र कितनी बार बोलें?

पूजा में 1 या 3 बार बोलना आम है। कई भक्त नवरात्रि में इसका 108 बार जप भी करते हैं।

यह मंत्र कब बोला जाता है?

नवरात्रि, दुर्गा पूजा, शुक्रवार को, देवी की आरती के बाद, और शादी जैसे शुभ अवसरों पर।

यह श्लोक कहाँ से है?

यह दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण का भाग) के ग्यारहवें अध्याय से है, जहाँ देवता देवी की नारायणी स्तुति करते हैं।

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