पूजा में दीपक कैसे जलाएँ: घी या तेल, बाती, दिशा और मंत्र
संक्षेप में: पूजा में दीपक आमतौर पर गाय के घी या तिल के तेल से जलाया जाता है; हनुमान जी और शनि देव के लिए कई लोग सरसों या तिल का तेल प्रयोग करते हैं। घी के दीपक में रुई की गोल (फूल) बाती और तेल में लंबी बाती आम है। परंपरा के अनुसार लौ पूर्व या उत्तर की ओर रखी जाती है, और दक्षिण की ओर नहीं। दीपक को फूँक मारकर नहीं बुझाते।
एक नज़र में
- घी
- सभी देवताओं के लिए, सबसे शुभ माना जाता है
- तिल का तेल
- सामान्य पूजा, शनि देव
- सरसों का तेल
- हनुमान जी, शनि देव, घर के द्वार पर
- लौ की दिशा
- पूर्व या उत्तर; दक्षिण नहीं (यम दीपक को छोड़कर)
दीपक जलाने की विधि
- दीपक (मिट्टी, पीतल या चाँदी का) साफ़ करें।
- घी या तेल डालें और रुई की बाती रखें: घी के लिए गोल फूल बाती, तेल के लिए लंबी बाती।
- दीपक को थोड़े अक्षत या छोटी थाली पर रखें, सीधे ज़मीन पर नहीं।
- लौ पूर्व या उत्तर की ओर रहे, ऐसे रखें।
- माचिस या दूसरे दीपक से जलाएँ और दीप मंत्र बोलें या भगवान का नाम लें।
- दीपक को भगवान के सामने रखें और हाथ जोड़कर प्रणाम करें।
दीप मंत्र
दीपक जलाकर कई परिवार यह श्लोक बोलते हैं: 'शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥' सरल अर्थ: हे दीपज्योति, आपको नमस्कार है; आप शुभ और कल्याण करती हैं, और मन से शत्रुता का भाव दूर करती हैं। यह एक प्रार्थना है, किसी फल की गारंटी नहीं।
क्या करें
- सुबह पूजा के समय और शाम को सूर्यास्त (संध्या) के समय दीपक जलाएँ।
- दीपक को बुझाना हो तो हाथ की हवा से, फूल से, या बाती को घी/तेल में धीरे से दबाकर बुझाएँ।
- कई लोग घी का दीपक भगवान के दाहिने ओर और तेल का दीपक बाईं ओर रखते हैं।
- दीपक के पास पर्दे, कागज़ या कपड़े न हों, इसका ध्यान रखें।
क्या न करें (प्रचलित मान्यता)
- दीपक को मुँह से फूँककर न बुझाएँ।
- टूटा या दरार वाला दीपक प्रयोग न करें।
- लौ को दक्षिण दिशा की ओर न रखें; यह दिशा पितरों और यम से जुड़ी मानी जाती है। (धनतेरस/छोटी दिवाली का यम दीपक इसका अपवाद है।)
- जलते दीपक को बिना देखे घर में अकेला न छोड़ें; सुरक्षा पहले।
तेल, बाती और दिशा के नियम क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग हैं। अपने परिवार की परंपरा मानें। कथामंत्र किसी विशेष फल का दावा नहीं करता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पूजा में घी का दीपक जलाएँ या तेल का?
दोनों ठीक हैं। घी को सबसे शुभ माना जाता है; तिल का तेल भी सामान्य पूजा में प्रयोग होता है।
हनुमान जी के लिए कौन सा दीपक जलाएँ?
कई भक्त मंगलवार और शनिवार को सरसों या चमेली के तेल का दीपक जलाते हैं; घी का दीपक भी जलाया जाता है।
दीपक की लौ किस दिशा में हो?
परंपरा के अनुसार पूर्व या उत्तर की ओर। दक्षिण की ओर नहीं, सिवाय यम दीपक के।
दीपक अपने आप बुझ जाए तो क्या करें?
घबराएँ नहीं, यह अशुभ नहीं है। बाती ठीक करके दोबारा जला दें और भगवान का नाम लें।
अखंड दीपक क्या है?
अखंड दीपक वह है जो व्रत या अनुष्ठान (जैसे नवरात्रि) के पूरे समय लगातार जलता रहता है। इसे जलाएँ तो सुरक्षा और लगातार देखरेख का ध्यान रखें।