व्रत या पूजा का संकल्प कैसे लें: सरल विधि और उदाहरण
संक्षेप में: संकल्प का अर्थ है भगवान के सामने अपना निश्चय बोलना कि आप कौन सा व्रत या पूजा, कब तक और किस भाव से कर रहे हैं। इसके लिए स्नान के बाद दाहिने हाथ में थोड़ा जल, अक्षत और फूल लेकर अपना नाम, गोत्र (यदि पता हो), स्थान, तिथि और उद्देश्य बोलते हैं, फिर जल ज़मीन या थाली में छोड़ देते हैं। संस्कृत न आए तो अपनी भाषा में संकल्प भी मान्य है।
एक नज़र में
- कब
- व्रत के दिन सुबह स्नान के बाद, पूजा की शुरुआत में
- हाथ में
- जल, अक्षत, फूल (कभी-कभी सिक्का)
- हाथ
- दाहिना हाथ
- भाषा
- संस्कृत या अपनी भाषा
संकल्प लेने की विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और पूजा-स्थान पर पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके बैठें।
- दीपक जलाएँ और गणेश जी का स्मरण करें।
- दाहिने हाथ में थोड़ा जल, कुछ अक्षत और एक फूल लें।
- अपना नाम, गोत्र (यदि पता हो), शहर, आज की तिथि या दिन, और व्रत या पूजा का नाम और उद्देश्य बोलें।
- बोलकर जल, अक्षत और फूल धीरे से ज़मीन पर या किसी थाली में छोड़ दें।
- फिर पूजा या व्रत शुरू करें।
सरल संकल्प का उदाहरण
'हे भगवान, मैं [अपना नाम], [गोत्र] गोत्र, [शहर] में, आज [तिथि/दिन] को, आपकी प्रसन्नता और अपने मन की शुद्धि के लिए [व्रत का नाम] का व्रत, अपनी शक्ति के अनुसार, विधिपूर्वक रखने का संकल्प लेता/लेती हूँ। मुझे इसे पूरा करने की शक्ति दें।'
जो लोग संस्कृत में संकल्प लेते हैं, वे पुरोहित से सही पाठ सीखें; उसमें संवत्, मास, पक्ष और तिथि का भी उल्लेख होता है।
क्या करें
- वही संकल्प लें जो आप सच में निभा सकें, जैसे निर्जला की जगह फलाहार।
- लंबे व्रत (जैसे 16 सोमवार) में पहले दिन पूरे व्रत का संकल्प लें।
- अगर गोत्र नहीं पता, तो 'कश्यप गोत्र' बोलने की परंपरा है, या केवल नाम बोलें।
क्या न करें
- दिखावे के लिए या दूसरों के दबाव में संकल्प न लें।
- स्वास्थ्य को ख़तरे में डालने वाला कठोर संकल्प न लें; बीमार, गर्भवती या बुज़ुर्ग पहले डॉक्टर से सलाह लें।
- संकल्प के बाद व्रत टूट जाए तो घबराएँ नहीं; भगवान से क्षमा माँगें और अगली बार पूरा करें।
संकल्प का पाठ परिवार, क्षेत्र और पुरोहित के अनुसार अलग होता है। यह एक सरल रूप है; अपनी परंपरा के अनुसार बदलें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संकल्प किस हाथ से लेते हैं?
दाहिने हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प लिया जाता है।
क्या हिंदी में संकल्प ले सकते हैं?
हाँ। भाव सबसे ज़रूरी है; अपनी भाषा में साफ़ मन से लिया संकल्प भी मान्य माना जाता है।
गोत्र न पता हो तो क्या करें?
परंपरा में 'कश्यप गोत्र' बोला जाता है, या केवल अपना नाम बोलें।
संकल्प के बाद व्रत टूट जाए तो?
भगवान से क्षमा माँगें। कई परिवार अगली बार व्रत दोबारा रखते हैं या दान करते हैं। अपने पुरोहित से पूछ सकते हैं।