तिलक कैसे लगाएँ: चंदन, कुमकुम, भस्म और अलग-अलग संप्रदायों के तिलक

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संक्षेप में: तिलक माथे पर दोनों भौंहों के बीच या उसके ऊपर लगाया जाने वाला पवित्र चिह्न है। यह चंदन, कुमकुम, रोली, हल्दी या भस्म से लगाया जाता है। वैष्णव भक्त ऊपर की ओर खड़ी रेखाओं वाला ऊर्ध्वपुंड्र, शैव भक्त भस्म की तीन आड़ी रेखाओं वाला त्रिपुंड्र, और देवी के भक्त कुमकुम की बिंदी या खड़ी रेखा लगाते हैं। घर में आमतौर पर स्नान और पूजा के बाद तिलक लगाया जाता है।

एक नज़र में

कहाँ
माथे पर, भौंहों के बीच (आज्ञा चक्र स्थान)
सामग्री
चंदन, गोपी चंदन, कुमकुम, रोली, हल्दी, भस्म
उँगली
ख़ुद को: आमतौर पर अनामिका; दूसरों को: अँगूठा या अनामिका
कब
स्नान और पूजा के बाद

तिलक के प्रकार (प्रचलित परंपरा)

  • ऊर्ध्वपुंड्र (वैष्णव): गोपी चंदन या सफ़ेद मिट्टी की दो खड़ी रेखाएँ, U या V आकार में; कई संप्रदायों में बीच में लाल या पीली रेखा।
  • त्रिपुंड्र (शैव): भस्म या चंदन की तीन आड़ी रेखाएँ, अक्सर बीच में लाल बिंदु।
  • कुमकुम/रोली (शाक्त और सामान्य पूजा): लाल बिंदी या छोटी खड़ी रेखा।
  • चंदन: सामान्य पूजा में लगभग सभी देवताओं के लिए; अक्सर चंदन के ऊपर कुमकुम।
  • हल्दी: गणेश जी और शुभ कामों में।

तिलक लगाने की विधि

  1. स्नान करके पूजा करें; पहले भगवान को चंदन या कुमकुम अर्पित करें।
  2. थोड़ा चंदन या कुमकुम हथेली या छोटी कटोरी में पानी के साथ मिलाकर गाढ़ा कर लें।
  3. अनामिका उँगली से भौंहों के बीच से ऊपर की ओर तिलक लगाएँ।
  4. त्रिपुंड्र के लिए तीन उँगलियों (तर्जनी, मध्यमा, अनामिका) पर भस्म लेकर बाएँ से दाएँ आड़ी रेखाएँ खींचें।
  5. तिलक लगाते समय अपने इष्टदेव का नाम लें।

क्या करें

  • पहले भगवान को तिलक लगाएँ, फिर प्रसाद रूप में ख़ुद लगाएँ।
  • अपने परिवार या संप्रदाय का तिलक ही लगाएँ, यदि वह तय है।
  • मेहमानों, बड़ों या भाई (रक्षाबंधन, भाई दूज) को तिलक लगाते समय उनके साथ अक्षत भी लगा सकते हैं।

क्या न करें

  • बिना स्नान के पूजा वाला तिलक न लगाएँ (कई परिवारों का नियम)।
  • रासायनिक या मिलावटी कुमकुम से बचें, इससे त्वचा पर जलन हो सकती है।
  • दूसरे संप्रदाय के तिलक का मज़ाक या अनादर न करें; सबके अपने नियम हैं।

तिलक के आकार, सामग्री और उँगली के नियम संप्रदाय और परिवार के अनुसार बहुत अलग हैं। अपने गुरु या परिवार की परंपरा मानें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिलक किस उँगली से लगाएँ?

ख़ुद को तिलक आमतौर पर अनामिका (रिंग फ़िंगर) से लगाया जाता है। दूसरों को अँगूठे से भी लगाते हैं। त्रिपुंड्र तीन उँगलियों से लगता है।

शिव जी के भक्त कौन सा तिलक लगाते हैं?

शैव भक्त भस्म या चंदन का त्रिपुंड्र, यानी तीन आड़ी रेखाएँ लगाते हैं।

वैष्णव तिलक कैसा होता है?

ऊर्ध्वपुंड्र: नाक के ऊपर से माथे तक दो खड़ी रेखाएँ। अलग-अलग संप्रदायों में इसका आकार और बीच का चिह्न अलग होता है।

क्या रोज़ तिलक लगाना ज़रूरी है?

यह व्यक्तिगत और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर है। कई भक्त रोज़ पूजा के बाद लगाते हैं, कई केवल पूजा और त्योहार के दिन।

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