तुलसी माला (कंठी) कैसे धारण करें और क्या नियम मानें

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संक्षेप में: तुलसी माला तुलसी की लकड़ी के मनकों से बनती है और वैष्णव भक्त इसे भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की भक्ति के चिह्न के रूप में गले में पहनते हैं। इसे स्नान के बाद भगवान को अर्पित करके, नाम-जाप के साथ धारण किया जाता है। पहनने वाले आमतौर पर सात्विक भोजन करते हैं और मांस, शराब व नशे से दूर रहते हैं। कई परंपराओं में यह गुरु से दीक्षा के समय मिलती है।

एक नज़र में

देवता
भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण, श्रीराम
कहाँ पहनें
गले में (कंठी), आमतौर पर दो या तीन लड़ी
शुभ दिन
एकादशी, गुरुवार, जन्माष्टमी या कोई भी शुभ दिन
जाप
हरे कृष्ण महामंत्र या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

कंठी माला और जप माला में अंतर

गले में पहनी जाने वाली छोटे मनकों की माला को 'कंठी' कहते हैं। जाप के लिए 108 मनकों वाली अलग माला होती है, जिसे आमतौर पर गले में नहीं पहना जाता, बल्कि जप-थैली (गोमुखी) में रखा जाता है। दोनों तुलसी की हो सकती हैं, पर इनका उपयोग अलग है।

तुलसी माला धारण करने की विधि

  1. कोई शुभ दिन चुनें, जैसे एकादशी या गुरुवार, या अपने गुरु से दिन पूछें।
  2. सुबह स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें।
  3. माला को गंगाजल या साफ़ पानी से धोकर (कई परिवार पंचगव्य या दूध से भी धोते हैं) सुखा लें।
  4. माला को भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की मूर्ति या तस्वीर के सामने फूल, धूप और दीपक के साथ अर्पित करें।
  5. भगवान का नाम लेते हुए प्रार्थना करें, फिर माला गले में पहनें। कई भक्त गुरु या मंदिर के पुजारी के हाथों पहनते हैं।

क्या करें

  • सादा शाकाहारी (सात्विक) भोजन करें।
  • रोज़ कुछ समय भगवान का नाम-जाप करें।
  • माला को साफ़ रखें; धागा कमज़ोर हो जाए तो नए धागे में पिरो लें।
  • अगर माला टूट जाए तो मनकों को आदर से इकट्ठा करें और नई माला पहनें; पुराने मनके बहते जल में या पौधे की मिट्टी में रख सकते हैं।

क्या न करें (प्रचलित नियम, परिवार के अनुसार अलग हो सकते हैं)

  • तुलसी माला पहनकर मांस, मछली, अंडा, शराब या कोई नशा न करें।
  • कई वैष्णव प्याज़ और लहसुन भी नहीं खाते।
  • माला को सजावट या फ़ैशन की चीज़ की तरह न बरतें।
  • कई परंपराओं में कंठी को बार-बार उतारा नहीं जाता, सोते और नहाते समय भी पहने रहते हैं; कुछ परिवार शौच या अशुद्ध अवस्था में उतारने को कहते हैं। अपनी परंपरा मानें।

ये परंपरागत नियम हैं; संप्रदाय, परिवार और गुरु के अनुसार अलग हो सकते हैं। कथामंत्र तुलसी माला से किसी विशेष लाभ या इलाज का दावा नहीं करता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुलसी माला किस दिन पहनें?

एकादशी, गुरुवार या जन्माष्टमी जैसे दिन शुभ माने जाते हैं। गुरु से दीक्षा लें तो वही दिन मान्य है।

क्या तुलसी माला पहनकर नॉन-वेज खा सकते हैं?

परंपरा के अनुसार नहीं। तुलसी माला पहनने वाले मांस, मछली, अंडा और शराब से दूर रहते हैं। अगर यह संभव न हो, तो माला न पहनना ही आदरपूर्ण माना जाता है।

क्या महिलाएँ तुलसी माला पहन सकती हैं?

हाँ, बहुत सी महिलाएँ पहनती हैं। मासिक धर्म के दिनों के नियम परिवार के अनुसार अलग हैं; अपनी परंपरा मानें।

तुलसी माला पहनकर सो सकते हैं?

हाँ, कंठी माला आमतौर पर हर समय पहनी जाती है। जप माला को सोते समय नहीं पहनते, उसे थैली में रखते हैं।

असली तुलसी माला कैसे पहचानें?

असली तुलसी के मनके हल्के होते हैं और उनमें लकड़ी के रेशे दिखते हैं। भरोसेमंद मंदिर या दुकान से ख़रीदना सबसे अच्छा तरीक़ा है।

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