अच्युताष्टकम् (अच्युतं केशवं) — अर्थ सहित

अच्युताष्टकम् भगवान विष्णु के अच्युत स्वरूप की स्तुति है, जिसे परंपरा से आदि शंकराचार्य की रचना माना जाता है। इसमें विष्णु के कृष्ण और राम दोनों अवतारों के नाम और लीलाएँ गाई गई हैं। 'अच्युतं केशवं' भजन के रूप में यह आज बहुत लोकप्रिय है।

8 श्लोक + फलश्रुति · लगभग 4 मिनट

अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम्। श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे॥१॥

अच्युतं केशवं सत्यभामाधवं माधवं श्रीधरं राधिकाराधितम्। इन्दिरामन्दिरं चेतसा सुन्दरं देवकीनन्दनं नन्दजं सन्दधे॥२॥

विष्णवे जिष्णवे शङ्खिने चक्रिणे रुक्मिणीरागिणे जानकीजानये। वल्लवीवल्लभायार्चितायात्मने कंसविध्वंसिने वंशिने ते नमः॥३॥

कृष्ण गोविन्द हे राम नारायण श्रीपते वासुदेवाजित श्रीनिधे। अच्युतानन्त हे माधवाधोक्षज द्वारकानायक द्रौपदीरक्षक॥४॥

राक्षसक्षोभितः सीतया शोभितो दण्डकारण्यभूपुण्यताकारणः। लक्ष्मणेनान्वितो वानरैः सेवितो- ऽगस्त्यसम्पूजितो राघवः पातु माम्॥५॥

धेनुकारिष्टकानिष्टकृद्द्वेषिहा केशिहा कंसहृद्वंशिकावादकः। पूतनाकोपकः सूरजाखेलनो बालगोपालकः पातु मां सर्वदा॥६॥

विद्युदुद्योतवत्प्रस्फुरद्वाससं प्रावृडम्भोदवत्प्रोल्लसद्विग्रहम्। वन्यया मालया शोभितोरःस्थलं लोहिताङ्घ्रिद्वयं वारिजाक्षं भजे॥७॥

कुञ्चितैः कुन्तलैर्भ्राजमानाननं रत्नमौलिं लसत्कुण्डलं गण्डयोः। हारकेयूरकं कङ्कणप्रोज्ज्वलं किङ्किणीमञ्जुलं श्यामलं तं भजे॥८॥

अच्युतस्याष्टकं यः पठेदिष्टदं प्रेमतः प्रत्यहं पूरुषः सस्पृहम्। वृत्ततः सुन्दरं कर्तृविश्वम्भरस् तस्य वश्यो हरिर्जायते सत्वरम्॥९॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अच्युत का क्या अर्थ है?

'अच्युत' यानी जो कभी गिरता नहीं, कभी नष्ट नहीं होता, अपने स्वरूप से कभी नहीं डिगता। यह भगवान विष्णु का एक नाम है।

अच्युताष्टकम् किसने लिखा?

परंपरा से इसे आदि शंकराचार्य की रचना माना जाता है।

'अच्युतं केशवं' भजन कब गाया जाता है?

इसे सुबह-शाम की पूजा, एकादशी, जन्माष्टमी, रामनवमी या किसी भी भजन-संध्या में गाया जा सकता है। कई लोग केवल पहला श्लोक भजन की तरह दोहराते हैं।

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