ॐ जय गंगे माता आरती — अर्थ सहित

'ॐ जय गंगे माता' पवित्र नदी माँ गंगा की आरती है। इसमें उनके निर्मल जल, राजा सगर के पुत्रों के उद्धार और उनकी शरण में आने वालों की मुक्ति का वर्णन है। गंगा दशहरा, कार्तिक पूर्णिमा, गंगा स्नान के बाद और घर की पूजा में यह आरती गाई जाती है।

5 पद · लगभग 3 मिनट

ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता। जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥

चंद्र सी ज्योत तुम्हारी, जल निर्मल आता। शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता॥

पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता। कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता॥

एक ही बार जो तेरी, शरणागति आता। यम की त्रास मिटाकर, परमगति पाता॥

आरती मात तुम्हारी, जो जन नित्य गाता। दास वही सहज में, मुक्ति को पाता॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गंगा आरती कब गाई जाती है?

हरिद्वार, ऋषिकेश और वाराणसी के घाटों पर रोज़ शाम को, और घर में गंगा दशहरा, कार्तिक पूर्णिमा, मकर संक्रांति या गंगा स्नान के बाद।

आरती में राजा सगर के पुत्रों का ज़िक्र क्यों है?

कथा के अनुसार कपिल मुनि के श्राप से सगर के साठ हज़ार पुत्र भस्म हो गए थे। उनके वंशज भगीरथ की तपस्या से गंगा धरती पर आईं और उनके जल से उन पुत्रों का उद्धार हुआ।

क्या घर पर गंगा आरती कर सकते हैं?

हाँ। गंगाजल के पात्र या माँ गंगा के चित्र के सामने दीपक जलाकर यह आरती घर पर भी श्रद्धा से गाई जाती है।

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