गङ्गे च यमुने चैव — स्नान मंत्र अर्थ सहित
यह भारत की सात पवित्र नदियों — गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु और कावेरी — का आवाहन करने वाला प्रसिद्ध मंत्र है। घर में स्नान करते समय या पूजा के कलश के जल को पवित्र करने के लिए इसे बोला जाता है, ताकि साधारण जल भी तीर्थ के जल जैसा पवित्र हो जाए।
गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥
अर्थ
पद 1
गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥
हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु और कावेरी! आप सब इस जल में आकर निवास करें।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गङ्गे च यमुने चैव कब बोलें?
रोज़ स्नान करते समय, पूजा के कलश में जल भरते समय, और अभिषेक या आचमन से पहले।
इसे कितनी बार बोलें?
आमतौर पर एक बार, जल को हाथ से छूते हुए या जल पर दृष्टि रखते हुए। कुछ लोग तीन बार बोलते हैं।
इस मंत्र में कौन-सी नदियाँ हैं?
सात पवित्र नदियाँ — गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु और कावेरी — जो उत्तर से दक्षिण तक पूरे भारत को जोड़ती हैं।