ॐ जय लक्ष्मी माता — अर्थ सहित

धन, सुख और समृद्धि की देवी माँ लक्ष्मी की आरती। दिवाली की पूजा और हर शुक्रवार को विशेष रूप से गाई जाती है।

8 पद · लगभग 4 मिनट

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥

उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥

दुर्गा रूप निरंजनि, सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता। कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥

शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता। रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥

महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई जन गाता। उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लक्ष्मी जी की आरती कब करें?

दिवाली की लक्ष्मी पूजा में, हर शुक्रवार को, और शाम के दीपक के समय।

दिवाली पर किसकी आरती पहले करें?

परंपरा से पहले गणेश जी की, फिर लक्ष्मी जी की आरती की जाती है।

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