जय जय श्री शनिदेव आरती — अर्थ सहित
'जय जय श्री शनिदेव' शनिदेव की सबसे प्रचलित आरती है। इसमें उन्हें सूर्य और छाया का पुत्र, भक्तों का हित करने वाला बताया गया है और उनके श्याम रूप, नीले वस्त्र और प्रिय भोग — तिल, तेल, उड़द — का वर्णन है। शनिवार की शाम और शनि जयंती पर यह आरती गाई जाती है।
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी। नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥
क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी। मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी। लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी। विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥
अर्थ
पद 1
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
भक्तों का भला करने वाले श्री शनिदेव, आपकी जय हो। हे प्रभु, आप सूर्यदेव के पुत्र हैं और छाया आपकी माता हैं।
पद 2
श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी। नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥
आपका शरीर साँवला है, दृष्टि तिरछी है और आप चार भुजाएँ धारण करते हैं। हे नाथ, आप नीले वस्त्र पहनते हैं और हाथी की सवारी करते हैं।
पद 3
क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी। मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
आपके सिर पर किरीट मुकुट शोभा देता है और माथा चमकता है। गले में मोतियों की माला इतनी सुंदर है कि मन बलिहारी जाता है।
पद 4
मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी। लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
आपको लड्डू, मिठाई, पान और सुपारी चढ़ाई जाती है। लोहा, तिल, तेल, उड़द और भैंस आपको बहुत प्रिय हैं।
पद 5
देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी। विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥
देवता, दानव, ऋषि, मुनि और सभी स्त्री-पुरुष आपका स्मरण करते हैं। विश्वनाथ भी आपका ध्यान करते हैं — हम आपकी शरण में हैं।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शनिदेव की आरती कब करनी चाहिए?
शनिवार की शाम, शनि मंदिर में या पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर। शनि जयंती और शनि अमावस्या पर इसे विशेष रूप से गाया जाता है।
शनिदेव को क्या चढ़ाया जाता है?
आरती के अनुसार तिल, सरसों का तेल, उड़द, लोहा और काले-नीले वस्त्र उन्हें प्रिय हैं। बहुत से भक्त शनिवार को ये चीज़ें दान भी करते हैं।
शनिदेव के माता-पिता कौन हैं?
परंपरा के अनुसार शनिदेव सूर्यदेव और छाया के पुत्र हैं, जैसा आरती की पहली पंक्ति में भी आता है। यमराज और यमुना उनके भाई-बहन माने जाते हैं।