शनि मंत्र — अर्थ और जप विधि
शनि देव सूर्य देव और छाया के पुत्र हैं और परंपरा में कर्म का फल देने वाले न्यायप्रिय देवता माने जाते हैं। 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' उनका छोटा बीज मंत्र है, और 'नीलाञ्जनसमाभासं' उनका प्रसिद्ध नवग्रह स्तोत्र श्लोक है। भक्त शनिवार को इनका जप करते हैं।
ॐ शं शनैश्चराय नमः॥
नीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥
अर्थ
मंत्र
ॐ शं शनैश्चराय नमः॥
'शं' बीज अक्षर के साथ, धीरे चलने वाले शनि देव को मेरा नमस्कार है।
पद 1
नीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥
जिनकी आभा नीले काजल जैसी है, जो सूर्य के पुत्र और यमराज के बड़े भाई हैं, जो छाया और सूर्य से उत्पन्न हुए — उन शनि देव को मैं प्रणाम करता हूँ।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शनि मंत्र कितनी बार जपें?
'ॐ शं शनैश्चराय नमः' का सामान्यतः 108 बार (एक माला) जप किया जाता है। 'नीलाञ्जनसमाभासं' श्लोक 1, 11 या 21 बार बोला जाता है।
शनि मंत्र का जप कब करें?
शनिवार को, विशेषकर शाम को, और शनि जयंती पर। परंपरा में पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाकर जप किया जाता है।
'शनैश्चर' नाम का अर्थ क्या है?
'शनैः' यानी धीरे और 'चर' यानी चलने वाला — शनि ग्रह आकाश में सबसे धीरे चलता दिखता है, इसलिए यह नाम पड़ा।