शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको — अर्थ सहित

यह गणपति की हिंदी आरती है जो महाराष्ट्र में गणेशोत्सव के दौरान 'सुखकर्ता दुखहर्ता' के बाद गाई जाती है। इसमें सिंदूर से सजे, गुड़ के लड्डू लिए, रिद्धि-सिद्धि के स्वामी गणेश का वर्णन है। अंतिम पंक्ति में 'गोसावीनंदन' का नाम आता है, जिन्हें इसका रचनाकार माना जाता है।

3 पद · लगभग 3 मिनट

शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको। दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरीहरको। हाथ लिए गुड़लड्डू सांई सुरवरको। महिमा कहे न जाय लागत हूँ पदको॥१॥

जय देव जय देव, जय जय श्री गणराज। विद्या सुखदाता, धन्य तुम्हारा दर्शन, मेरा मन रमता॥ धृ.॥

अष्टौ सिद्धि दासी संकटको बैरी। विघ्नविनाशन मंगल मूरत अधिकारी। कोटीसूरजप्रकाश ऐसी छबि तेरी। गंडस्थलमदमस्तक झूले शशिबिहारी॥२॥

भावभगत से कोई शरणागत आवे। संतति संपत्ति सबही भरपूर पावे। ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे। गोसावीनंदन निशिदिन गुन गावे॥३॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'शेंदुर लाल चढ़ायो' किस भाषा में है?

यह पुरानी हिंदी (ब्रज जैसी बोली) में है, हालाँकि यह सबसे ज़्यादा महाराष्ट्र की गणेश आरतियों में गाई जाती है।

गणेश जी को सिंदूर क्यों चढ़ाते हैं?

परंपरा में लाल सिंदूर को शुभ और मंगल का रंग माना जाता है। महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिरों में गणपति की मूर्तियाँ सिंदूर से ही सजी होती हैं।

यह आरती कब गाई जाती है?

गणेश चतुर्थी और गणेशोत्सव के दस दिनों में सुबह-शाम, 'सुखकर्ता दुखहर्ता' के बाद; और संकष्टी चतुर्थी पर भी।

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