संतोषी माता चालीसा — अर्थ सहित

माँ संतोषी भगवान गणेश की पुत्री और शुभता की देवी हैं। शुक्रवार को उनका व्रत रखने और इस चालीसा का पाठ करने से परिवार में सुख-शांति और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। व्रत में खट्टी चीज़ें वर्जित हैं।

40 चौपाई · लगभग 10 मिनट

॥ दोहा ॥

जय संतोषी माता जय, सुख-संतोष दाता। गणपति नंदिनी पावन, जग की माता॥

॥ दोहा ॥

शुक्रवार को जो व्रत करे। संतोषी माँ की कृपा भरे। खट्टा न खाए व्रत में कोई। मनोकामना पूर्ण हो सोई॥

॥ चौपाई ॥

जय संतोषी जय जग माता। भक्तों की पीड़ा हरो, दाता। गणेश-नंदिनी महा-पवित्री। शुभ-लक्षणा सौभाग्य-चरित्री॥

॥ चौपाई ॥

श्वेत वस्त्र धारण करती हो। हाथ में पुष्प-माला लेती हो। मुख पर दिव्य प्रकाश छाया। जग को देती सुख की माया॥

॥ चौपाई ॥

शुक्रवार को पूजन करते। गुड़ और चना भोग धरते। व्रत कथा सुनते ध्यान लगाते। संतोषी माँ की जय-जय गाते॥

॥ चौपाई ॥

सोलह शुक्रवार जो व्रत करे। संतोषी माँ की कृपा भरे। उद्यापन करके पाएं फल। घर में आए सुख का पहल॥

॥ चौपाई ॥

संतान सुख चाहे जो कोई। संतोषी माँ का व्रत धरे सोई। पुत्र-पुत्री सुखी करावें। घर में आनंद का बास लावें॥

॥ चौपाई ॥

व्यापार में जो बाधा आए। शुक्रवार व्रत से दूर हो जाए। नौकरी में आए उन्नति। संतोषी माँ की है यह कृपा-मति॥

॥ चौपाई ॥

विवाह में आए अड़चन जो। संतोषी माँ की पूजा धरो। शीघ्र विवाह होगा सुखकर। घर में आएगा सुख का पहर॥

॥ चौपाई ॥

रोगी को देती आरोग्य माँ। दुखी मन को देती संयोग माँ। भयभीत को देती अभय। संकट में करती निर्भय॥

॥ चौपाई ॥

गृहस्थी में सुख-शांति लाएं। दांपत्य में प्रेम बढ़ाएं। सास-बहू का झगड़ा मिटाएं। घर को स्वर्ग-समान बनाएं॥

॥ चौपाई ॥

देश के कोने-कोने में माँ। सम्बलपुर, मुंबई में माँ। कोलकाता और मद्रास में। विराजती संतोषी उजास में॥

॥ चौपाई ॥

संतोषी चालीसा जो गावे। माँ की कृपा मनचाही पावे। शुक्रवार को नित पाठ करे। उसके जीवन के दुख सब हरे॥

॥ दोहा ॥

जय संतोषी जय सदा, करो सदा कल्याण। भक्त के मनोरथ पूरे करो, देहु सुख-वरदान॥

इसके बाद पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संतोषी माता का व्रत कैसे करें?

शुक्रवार को सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करें, संतोषी माँ की पूजा करें, व्रत-कथा पढ़ें। खट्टी चीज़ें बिल्कुल न खाएं। गुड़-चना का प्रसाद बाँटें। सोलह शुक्रवार के व्रत के बाद उद्यापन करें।

संतोषी माता के व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?

संतोषी माता के व्रत में खट्टी चीज़ें — नींबू, इमली, अमचूर, दही, आचार — बिल्कुल वर्जित हैं। परिवार के किसी सदस्य को भी उस दिन खट्टा नहीं खाना चाहिए।

संतोषी माता कौन हैं?

संतोषी माता भगवान गणेश की पुत्री और सिद्धि-बुद्धि की बहन मानी जाती हैं। वे संतोष और तृप्ति की देवी हैं। शुक्रवार उनका प्रिय दिन है।

इस बारे में कुछ पूछें

पढ़ने की सेटिंग

रंग

अक्षर का आकार