सूर्य चालीसा — अर्थ सहित

सूर्यदेव समस्त सृष्टि के प्राणदाता और नवग्रहों में सर्वोच्च हैं। रविवार को सूर्य चालीसा का पाठ करने से आरोग्य, यश और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। छठ पूजा में भी सूर्यदेव की विशेष उपासना होती है।

40 चौपाई · लगभग 10 मिनट

॥ दोहा ॥

जय जय जय सूर्य भगवान, जग के प्राण प्रदाता। सात अश्व रथ पर विराजे, जग के जीवन-दाता॥

॥ दोहा ॥

अरुण सारथी रथ पर सोहे। दर्शन करके सब मन मोहे। कमल हाथ में धारण किए। जग को उजियारा दान किए॥

॥ चौपाई ॥

जय जय सूर्य सुरेश महाना। देव ग्रहों के हो सुल्तान। कश्यप पुत्र अदिति के नंदन। देवताओं के हो परम वंदन॥

॥ चौपाई ॥

रवि, भानु, दिवाकर नाम। आदित्य, मित्र, पूषन धाम। विवस्वान, अर्क, सहस्रांशु। भास्कर, त्वष्टा, अंशु-मालु॥

॥ चौपाई ॥

सात रंग की किरण बिखेरे। सात अश्व रथ पर सवेरे। पूर्व दिशा से उदित होते। जग को जीवन-शक्ति देते॥

॥ चौपाई ॥

रविवार को जो पूजा करे। सूर्यदेव की कृपा भरे। लाल पुष्प और लाल चंदन। चढ़ाएं गुड़ और गेहूं नंदन॥

॥ चौपाई ॥

सूर्योदय में अर्घ्य दो। ताम्बे के पात्र से जल चढ़ाओ। गायत्री मंत्र उच्चारण करो। आदित्य-हृदय स्तोत्र पढ़ो॥

॥ चौपाई ॥

नेत्र रोग को दूर करते। त्वचा रोग को भी हरते। आरोग्य का दान देते। दीर्घ आयु का वरदान देते॥

॥ चौपाई ॥

छठ पूजा में विशेष पूजन। बिहार-पूरब का प्रिय अनुपम। डूबते सूरज की पूजा होती। सुख-समृद्धि की धारा होती॥

॥ चौपाई ॥

सूर्य-ग्रह पीड़ा जो पाए। सूर्य चालीसा से दूर हो जाए। लाल वस्त्र धारण करे रवि को। मिटे सभी दोष तन-मन को॥

॥ चौपाई ॥

कुंडली में सूर्य निर्बल हो। तो नित पाठ कर बलवल हो। पिता-पक्ष सुख-समृद्धि पाए। राज्य और पद-प्रतिष्ठा आए॥

॥ चौपाई ॥

सूर्य चालीसा नित पढ़े जो। उसे मिले तेज-यश जो। रोगमुक्त हो काया उसकी। कृपा बने सूर्यदेव की उसकी॥

॥ दोहा ॥

सूर्य चरण नमो नमो, करो कृपा अपार। देहु तेज बुद्धि बल, आरोग्य का उपहार॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूर्य देव को अर्घ्य कैसे दें?

सूर्योदय के समय ताम्बे के लोटे में जल, लाल पुष्प और रोली डालकर पूर्व दिशा में मुख करके सूर्यदेव को अर्घ्य दें। 'ॐ सूर्याय नमः' का जाप करते हुए तीन बार जल चढ़ाएं।

सूर्य ग्रह दोष का उपाय क्या है?

सूर्य ग्रह दोष के लिए रविवार का व्रत रखें, सूर्य चालीसा और आदित्य-हृदय स्तोत्र का पाठ करें, लाल वस्त्र पहनें और माणिक रत्न धारण करने पर विचार करें — ये परंपरागत उपाय हैं।

सूर्यदेव के 12 नाम कौन से हैं?

सूर्यदेव के 12 नाम हैं — मित्र, रवि, सूर्य, भानु, खग, पूषन, हिरण्यगर्भ, मरीचि, आदित्य, सवितृ, अर्क और भास्कर।

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