सूर्य मंत्र — अर्थ और जप विधि
सूर्य देव प्रत्यक्ष दिखने वाले देवता हैं, जो पूरे संसार को प्रकाश और जीवन देते हैं। सुबह सूर्य को जल (अर्घ्य) चढ़ाते हुए 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' का जप किया जाता है। 'जपाकुसुमसङ्काशं' नवग्रह स्तोत्र का पहला श्लोक है, जिसमें सूर्य को अंधकार का शत्रु कहा गया है।
ॐ घृणि सूर्याय नमः॥
जपाकुसुमसङ्काशं काश्यपेयं महाद्युतिम्। तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥
अर्थ
मंत्र
ॐ घृणि सूर्याय नमः॥
प्रकाश और तेज से भरे सूर्य देव को मेरा नमस्कार है।
पद 1
जपाकुसुमसङ्काशं काश्यपेयं महाद्युतिम्। तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥
जो गुड़हल के फूल जैसे लाल हैं, महर्षि कश्यप के पुत्र हैं, महान तेज वाले हैं, अंधकार के शत्रु हैं और सब पाप मिटाते हैं — उन दिन करने वाले सूर्य देव को मैं प्रणाम करता हूँ।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सूर्य मंत्र कितनी बार जपें?
'ॐ घृणि सूर्याय नमः' का 108 बार (एक माला) या अर्घ्य देते समय 3, 7 या 12 बार जप किया जाता है।
सूर्य मंत्र कब बोलना चाहिए?
सुबह सूर्योदय के समय, तांबे के लोटे से सूर्य को जल चढ़ाते हुए। रविवार, मकर संक्रांति और छठ पर्व पर इसका विशेष महत्व है।
'घृणि' का अर्थ क्या है?
'घृणि' का अर्थ है प्रकाश की किरण या तेज। 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' यानी तेजस्वी सूर्य को नमस्कार।