ॐ जय सूर्य भगवान आरती — अर्थ सहित

'ॐ जय सूर्य भगवान' सूर्य देव की प्रचलित आरती है। इसमें उन्हें जगत की आँख, सात घोड़ों के रथ पर सवार और सब जीवों का प्राण बताया गया है। सुबह-शाम के उनके रूप और आदित्य हृदय स्तोत्र का भी ज़िक्र है। रविवार, छठ पूजा और मकर संक्रांति पर अर्घ्य के बाद यह गाई जाती है।

8 पद · लगभग 6 मिनट

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान। जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा। धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान॥

सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी॥ अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान॥

ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते॥ फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान॥

संध्या में भुवनेश्वर, अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते॥ गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान॥

देव दनुज नर नारी, ऋषि मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते॥ स्त्रोत ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान॥

तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार॥ प्राणों का सिंचन करके, भक्तों को अपने देते। बल बुद्धि और ज्ञान॥

भूचर जल चर खेचर, सब के हो प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं॥ वेद पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्व शक्तिमान॥

पूजन करती दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल॥ ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूर्य देव की आरती कब करें?

सुबह सूर्य को जल (अर्घ्य) चढ़ाने के बाद, विशेष रूप से रविवार को। छठ पूजा, मकर संक्रांति और रथ सप्तमी पर भी यह गाई जाती है।

सूर्य देव का दिन कौन-सा है?

रविवार सूर्य देव का दिन माना जाता है। कई लोग इस दिन व्रत रखते हैं और नमक नहीं खाते।

आरती में आदित्य हृदय का ज़िक्र क्यों है?

आदित्य हृदय सूर्य देव का प्रसिद्ध स्तोत्र है, जो वाल्मीकि रामायण में अगस्त्य मुनि ने श्रीराम को रावण से युद्ध से पहले सिखाया था।

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