कृष्ण गायत्री मंत्र — अर्थ और जप विधि
कृष्ण गायत्री मंत्र गायत्री छंद में श्रीकृष्ण की प्रार्थना है। इसमें उन्हें माता देवकी के नंदन और वासुदेव कहकर ध्यान किया जाता है, और प्रार्थना की जाती है कि वे हमारी बुद्धि को सही राह दिखाएँ। जन्माष्टमी और एकादशी पर इसका जप बहुत लोकप्रिय है।
ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नः कृष्णः प्रचोदयात्॥
अर्थ
मंत्र
ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नः कृष्णः प्रचोदयात्॥
हम माता देवकी के पुत्र को जानें, वासुदेव का ध्यान करें — वे श्रीकृष्ण हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कृष्ण गायत्री मंत्र कितनी बार जपें?
सामान्यतः 108 बार (एक माला)। शुरुआत में 11 या 21 बार से भी कर सकते हैं।
यह मंत्र कब जपना चाहिए?
सुबह स्नान के बाद, जन्माष्टमी पर, एकादशी को और रोज़ की कृष्ण पूजा में।
अंतिम पंक्ति 'तन्नो कृष्णः' है या 'तन्नः कृष्णः'?
दोनों रूप सुनने को मिलते हैं। संस्कृत संधि के अनुसार 'क' से पहले 'तन्नः' सही रूप है, पर 'तन्नो कृष्ण प्रचोदयात्' भी बहुत प्रचलित है।