कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने — मंत्र अर्थ सहित
यह श्रीकृष्ण का बहुत प्रिय श्लोक है, जो श्रीमद्भागवत पुराण के दसवें स्कंध में आता है। इसमें भगवान को कृष्ण, वासुदेव, हरि, परमात्मा और गोविंद कहकर बार-बार प्रणाम किया गया है, और उन्हें शरण में आए भक्तों के कष्ट दूर करने वाला बताया गया है। बहुत से भक्त इसका रोज़ जप करते हैं।
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥
अर्थ
मंत्र
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥
श्रीकृष्ण, वासुदेव, हरि और परमात्मा को — जो शरण में आए भक्तों के कष्ट मिटाते हैं — उन गोविंद को बार-बार नमस्कार है।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
इसके बाद पढ़ें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह मंत्र कितनी बार जपें?
रोज़ 108 बार (एक माला) या अपनी श्रद्धा अनुसार 11, 21 बार। तुलसी की माला शुभ मानी जाती है।
इस मंत्र का जप कब करें?
सुबह-शाम पूजा में, जन्माष्टमी और एकादशी पर, या जब भी मन परेशान हो और भगवान की शरण चाहिए।
यह श्लोक कहाँ से है?
यह श्रीमद्भागवत पुराण के दसवें स्कंध से है। परंपरा के अनुसार इसे जरासंध की कैद से छूटे राजाओं ने श्रीकृष्ण की स्तुति में कहा था।