लक्ष्मी गायत्री मंत्र — अर्थ और जप विधि
लक्ष्मी गायत्री मंत्र गायत्री छंद में माँ महालक्ष्मी की प्रार्थना है। इसमें उन्हें भगवान विष्णु की पत्नी कहकर ध्यान किया जाता है। परंपरा में लक्ष्मी जी केवल धन की नहीं, बल्कि शुभता, सौंदर्य और घर की सुख-शांति की देवी भी हैं। दिवाली और शुक्रवार को इसका जप लोकप्रिय है।
ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥
अर्थ
मंत्र
ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥
हम माँ महालक्ष्मी को जानें, भगवान विष्णु की पत्नी का ध्यान करें — वे माँ लक्ष्मी हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।
अर्थ कथामंत्र टीम ने सरल भाषा में लिखे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लक्ष्मी गायत्री मंत्र कितनी बार जपें?
सामान्यतः 108 बार (एक माला)। शुरुआत में 11 या 21 बार से भी कर सकते हैं।
यह मंत्र कब जपना चाहिए?
शुक्रवार को, दिवाली और शरद पूर्णिमा पर, सुबह या शाम दीपक जलाकर।
लक्ष्मी गायत्री और 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' में क्या अंतर है?
'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' एक छोटा नमस्कार मंत्र है, जबकि लक्ष्मी गायत्री गायत्री छंद में ध्यान और बुद्धि की प्रेरणा की प्रार्थना है। दोनों का जप किया जा सकता है।