बजरंग बाण — अर्थ सहित

बजरंग बाण अवधी में हनुमान जी की एक प्रबल प्रार्थना है, जिसे परंपरा से गोस्वामी तुलसीदास से जोड़ा जाता है। इसमें भक्त हनुमान जी के पराक्रम याद करके उन्हें राम की शपथ देकर तुरंत रक्षा के लिए पुकारता है। इसे आमतौर पर मंगलवार या शनिवार को, श्रद्धा और नियम के साथ पढ़ा जाता है।

2 दोहे + 32 चौपाई · लगभग 7 मिनट

॥ दोहा ॥

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥

॥ चौपाई ॥

जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥

॥ चौपाई ॥

जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥

॥ चौपाई ॥

जैसे कूदि सिंधु महिपारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥

॥ चौपाई ॥

आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका॥

॥ चौपाई ॥

जाय बिभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा॥

॥ चौपाई ॥

बाग उजारि सिंधु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥

॥ चौपाई ॥

अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥

॥ चौपाई ॥

लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥

॥ चौपाई ॥

अब बिलंब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अंतरयामी॥

॥ चौपाई ॥

जय जय लखन प्रान के दाता। आतुर ह्वै दुख करहु निपाता॥

॥ चौपाई ॥

जै हनुमान जयति बल-सागर। सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥

॥ चौपाई ॥

ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहि मारु बज्र की कीले॥

॥ चौपाई ॥

ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥

॥ चौपाई ॥

जय अंजनि कुमार बलवंता। शंकरसुवन बीर हनुमंता॥

॥ चौपाई ॥

बदन कराल काल-कुल-घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक॥

॥ चौपाई ॥

भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर। अगिन बेताल काल मारी मर॥

॥ चौपाई ॥

इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की॥

॥ चौपाई ॥

सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै। राम दूत धरु मारु धाइ कै॥

॥ चौपाई ॥

जय जय जय हनुमंत अगाधा। दुख पावत जन केहि अपराधा॥

॥ चौपाई ॥

पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥

॥ चौपाई ॥

बन उपबन मग गिरि गृह माहीं। तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं॥

॥ चौपाई ॥

जनकसुता हरि दास कहावौ। ताकी सपथ बिलंब न लावौ॥

॥ चौपाई ॥

जै जै जै धुनि होत अकासा। सुमिरत होय दुसह दुख नासा॥

॥ चौपाई ॥

चरन पकरि, कर जोरि मनावौं। यहि औसर अब केहि गोहरावौं॥

॥ चौपाई ॥

उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई। पायँ परौं, कर जोरि मनाई॥

॥ चौपाई ॥

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥

॥ चौपाई ॥

ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥

॥ चौपाई ॥

अपने जन को तुरत उबारौ। सुमिरत होय आनंद हमारौ॥

॥ चौपाई ॥

यह बजरंग-बाण जेहि मारै। ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥

॥ चौपाई ॥

पाठ करै बजरंग-बाण की। हनुमत रक्षा करै प्रान की॥

॥ चौपाई ॥

यह बजरंग बाण जो जापैं। तासों भूत-प्रेत सब कापैं॥

॥ चौपाई ॥

धूप देय जो जपै हमेसा। ताके तन नहिं रहै कलेसा॥

॥ दोहा ॥

उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान। बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बजरंग बाण का पाठ कब करना चाहिए?

परंपरा से मंगलवार या शनिवार को, स्नान के बाद, हनुमान जी के सामने दीप या धूप जलाकर इसका पाठ किया जाता है। बहुत से भक्त इसे संकट के समय पढ़ते हैं।

बजरंग बाण और हनुमान चालीसा में क्या अंतर है?

हनुमान चालीसा हनुमान जी के गुणों की शांत स्तुति है। बजरंग बाण एक तीव्र पुकार है, जिसमें भक्त राम की शपथ देकर हनुमान जी से तुरंत रक्षा माँगता है। इसलिए कई लोग इसे श्रद्धा और नियम से ही पढ़ने की सलाह देते हैं।

बजरंग बाण किसने लिखा?

परंपरा से इसे गोस्वामी तुलसीदास से जोड़ा जाता है, हालाँकि कुछ विद्वान इस पर मतभेद रखते हैं। यह अवधी भाषा में है।

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