शिव पंचाक्षर स्तोत्र (नागेन्द्रहाराय) — अर्थ सहित

शिव पंचाक्षर स्तोत्र 'नमः शिवाय' मंत्र के पाँच अक्षरों — न, म, शि, वा, य — पर आधारित है। हर श्लोक एक अक्षर से शुरू होकर शिव जी के रूप का वर्णन करता है। परंपरा से इसे आदि शंकराचार्य की रचना माना जाता है। रोज़ की शिव पूजा में यह बहुत लोकप्रिय है।

5 श्लोक + फलश्रुति · लगभग 3 मिनट

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नमः शिवाय॥१॥

मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय। मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै मकाराय नमः शिवाय॥२॥

शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द- सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय। श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै शिकाराय नमः शिवाय॥३॥

वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य- मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय। चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै वकाराय नमः शिवाय॥४॥

यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय। दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै यकाराय नमः शिवाय॥५॥

पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ। शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥६॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचाक्षर का क्या अर्थ है?

पंचाक्षर यानी पाँच अक्षर — 'न म शि वा य', जिनसे 'नमः शिवाय' मंत्र बनता है। इस स्तोत्र का हर श्लोक इन्हीं में से एक अक्षर की महिमा गाता है।

शिव पंचाक्षर स्तोत्र किसने लिखा?

परंपरा से इसे आदि शंकराचार्य की रचना माना जाता है।

इसका पाठ कब करें?

रोज़ सुबह या शाम शिव पूजा में, विशेषकर सोमवार, सावन और महाशिवरात्रि पर। कई भक्त इसके बाद 'ॐ नमः शिवाय' का जप करते हैं।

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